Bansi Kaanh Acharj Bajai - Bulleh Shah

15. बंसी काहन अचरज बजाई
(from )

Bansi Kaanh Acharj Bajaai

Bansi valeyaa chaaka raanjha, tera sur hai sab naal saanjha
teriyaan maujaan saada maanjaha, saadi sur tain aap milaai
Bansi Kaan Acharj Bajaai

बंसी वालिआ चाका रांझा, तेरा सुर है सभ नाल सांझा,
तेरियां मौजां साडा मांझा, साडी सुर तैं आप मिलाई ।
बंसी काहन अचरज बजाई ।

बंसी वालिआ काहन कहावें, सब दा नेक अनूप मनावें,
अक्खियां दे विच नज़र ना आवें, कैसी बिखड़ी खेल रचाई ।
बंसी काहन अचरज बजाई ।

बंसी सभ कोई सुने सुणावे, अरथ इस दा कोई विरला पावे,
जो कोई अनहद की सुर पावे, सो इस बंसी का शौदाई ।
बंसी काहन अचरज बजाई ।

सुणीआं बंसी दियां घंगोरां, कूकां तन मन वांङू मोरां,
डिठियां इस दियां तोड़ां जोड़ां, इक सुर दी सभ कला उठाई ।
बंसी काहन अचरज बजाई ।

इस बंसी दा लंमा लेखा, जिस ने ढूंडा तिस ने देखा,
शादी इस बंसी दी रेखा, एस वजूदों सिफत उठाई ।
बंसी काहन अचरज बजाई ।

इस बंसी दे पंज सत तारे, आप आपनी सुर भरदे सारे,
इक सुर सभ दे विच दम मारे, साडी इस ने होश भुलाई ।
बंसी काहन अचरज बजाई ।

बुल्ल्हा पुज्ज पए तकरार, बूहे आण खलोते यार,
रक्खीं कलमे नाल ब्योपार, तेरी हज़रत भरे गवाही ।
बंसी काहन अचरज बजाई ।

English Discourse: 
http://www.sikhmysticism.org/LiveDiscourses.aspx (Under Bulleh Shah, Page 2, Accessed July 30, 2020)

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